Gawar (Cluster Bean) is a highly profitable vegetable crop grown in Kharif and Zaid seasons. With proper land preparation, balanced fertilization, and timely irrigation, farmers can achieve higher pod yield and superior market quality.
HaldiGhati Seeds offers 6 improved research varieties of Gawar designed for vigorous growth, early pod formation, and consistent production.
Early, uniform pods with strong plants and excellent production—ideal for fresh vegetable markets.
High-yield variety with tender green pods, fast growth, and good resistance to common diseases.
Consistent pod setting, vigorous branching, and superior pod length for commercial growers.
A dependable variety suitable for Kharif & Zaid, producing high-quality pods throughout picking cycles
Known for strong plant structure, uniform pod size, and reliable performance in all soil types.
Ideal for both vegetable and seed production; produces clean, shiny pods and matures uniformly.
"My crop yield improved clearly after switching to Haldighati Seeds."
Babulal
Farmer, Rajasthan"Purity and growth results are far better than other brands."
Rajesh
Farm Dealer, Madhya Pradesh"Their seeds perform consistently even in tough climate conditions."
Narendra
Farmer, Gujarat
किस्मे – सरित सौम्या -700, सरित सौम्य-799, जरगा, सौम्या-700, सौम्या-799, दिव्या
बुवाई का समय:– खरीफ व जायद
खेत की तैयारी:–
खेत को एक या दो बार गहरी जुताई करे व पाटा लगा कर खेत तैयार करे।
खेत तैयार करते समय ध्यान रखे कि खरपतवार व कचरा नष्ट हो जाये।
मिट्टी:–
बलुई दोमट मिट्टी, उपजाऊ, अच्छी जल निकासी वाली होनी चाहिये।
बीज कि मात्रा – 12 से 15 कि.ग्रा. / प्रति हेक्टेयर, ( सरित सौम्या -700, सरित सौम्य-799, जरगा, सौम्या-700, सौम्या-799) , दिव्या – बीज की मात्रा 15 से 18 कि.ग्रा. प्रति हेक्टेयर
उर्वरक:-
1.बुवाई से पहले 20-25 टन जैविक कम्पोस्ट (खाद) प्रति हेक्टेयर मिट्टी में अच्छे से मिलाये।
2.20 कि.ग्रा. नाइट्रोजन व 60 कि.ग्रा. फास्फोरस व पोटेषियम 60 कि.ग्रा. प्रति हेक्टेयर बुवाई के समय डाले।
निराई गुडाई:–
अच्छी फसल के लिए निराई गुडाई अवष्य करनी चाहिए। इसके लिए बुवाई के 20 दिन पश्चात निराई गुडाई करें।
खरपतवार नियन्त्रण के लिए आवष्यकता अनुसार 2-3 बार निराई गुडाई करें।
बुवाई कि विधि व दूरी:–
बुवाई पंक्तियो में करनी चाहिए पंक्ति से पंक्ति की दूरी 30-45 से.मी. व पौधे से पौधे 15 से.मी. की दूरी पर रखे।
तुडाई – हरिफलियाँ 45-50 दिन उपरान्त ही तोडने की स्थिति में आ जाती है। और फलिया आते ही तुडाई करते रहना चाहिये ताकि अधिक उपज प्राप्त हो सके।
सिचाई:– बुवाई के समय मिट्टी में पर्याप्त नमी का होना आवष्यक है। या बुवाई के तत्काल बाद सिंचाई करें। सिंचाई कि मात्रा भूमि के प्रकार,स्थिति व जलवायु परिस्थितियो पर निर्भर करती है।
पौध संरक्षण उपाय:–
छाछया रोग:– 25 कि.ग्रा.गंधक चूर्ण प्रति हेक्टेयर से छिडकाव करें।
लीफ ब्लाईट:– 2.5 कि.ग्रा. से 3 कि.ग्रा. काॅपर फंगीसाइड प्रति हेक्टेयर का उपयोग करें।
ग्वार को कीटो और बीमारियो से बचाने के लिए उचित उपाय करे।
नोट:- किसी भी मौसम में (विषेष रूप से बरसात के मौसम में) ग्वार फसल की अत्याधिक वृद्धि को रोकने के लिए और समय पर पुष्पन को सुनिष्चित करने के लिए, फसल के एक महीने के बाद लिहोसीन (बीएएसएफ इंडिया लिमिटेड) के 10 मिलीलीटर प्रति पंप का छिडकांव करें और दूसरा छिडकांव पहले के 10 दिन बाद करें। केवल यूरिया के उपयोग से बचें।
नोट- उपरोक्त सभी जानकारियां हमारे अनुसंधान केंन्द्र पर किये गये प्रयोग पर आधारित है, भिन्न स्थानों पर भिन्न मौसम, भूमी प्रकार एवं ऋतू के कारण उपरोक्त जानकारी में बदलाव आ सकता है।