(Chawla) is one of the most dependable vegetable crops for Kharif and Zaid seasons. With proper soil preparation, balanced fertilizers, timely irrigation, and pest management, farmers can achieve excellent pod quality and higher yields.
HaldiGhati Seeds offers 6 improved research varieties of Chawla, each known for strong plant growth, early pod setting, and superior market value.
Early-maturing Kharif variety with vigorous plants and high-quality tender pods.
Suitable for both Kharif & Zaid seasons; known for uniform pods & consistent yield.
High-yield chawla variety with good pod length, strong plants, & market-preferred color.
Fast-growing type, ready in 45–50 days; ideal for commercial vegetable growers.
Healthy green pods, strong branching, and reliable productivity across seasons.
Attractive pod color, early pod setting, and excellent performance in diverse soils.
"My crop yield improved clearly after switching to Haldighati Seeds."
Babulal
Farmer, Rajasthan"Purity and growth results are far better than other brands."
Rajesh
Farm Dealer, Madhya Pradesh"Their seeds perform consistently even in tough climate conditions."
Narendra
Farmer, Gujarat
चवला -किस्मे – सोनाली, रेवती, हरि प्रीया, हरिता, चित्रा, बुवाई का समय:- खरीफ व जायद
चवला -किस्मे – सोनाली, रेवती, हरि प्रीया, हरिता, चित्रा, बुवाई का समय:– खरीफ व जायद
चवला – किस्म – श्यामला बुवाई का समय:- खरीफ
खेत की तैयारी:–
खेत को एक या दो बार गहरी जुताई करे व पाटा लगा कर खेत तैयार करे।
खेत तैयार करते समय ध्यान रखे कि खरपतवार व कचरा नष्ट हो जाये।
मिट्टी:– बलुई दोमट मिट्टी, उपजाऊ, अच्छी जल निकासी वाली होनी चाहिये।
बीज कि मात्रा – 12 से 15 कि.ग्रा. / प्रति हेक्टेयर
बीज हल्दीघाटी सीड्स का संषोधित (रिसर्च) किस्म श्यामला उपयोग में लेवे।
उर्वरक:–
1. बुवाई से पहले 20-25 टन जैविक कम्पोस्ट (खाद) प्रति हेक्टेयर मिट्टी में अच्छे से मिलाये।
2. 12 कि.ग्रा. नाइट्रोजन व 60 कि.ग्रा. फास्फोरस व पोटेषियम 60 कि.ग्रा. प्रति हेक्टेयर बुवाई के समय डाले।
निराई गुडाई:–
अच्छी फसल के लिए निराई गुडाई अवष्य करनी चाहिए। इसके लिए बुवाई के 20 दिन पश्चात निराई गुडाई करें। खरपतवार नियन्त्रण के लिए आवष्यकता अनुसार 2-3 बार निराई गुडाई करें।
बुवाई कि विधि व दूरी: – बुवाई पंक्तियो में करनी चाहिए पंक्ति से पंक्ति की दूरी 45-50 से.मी. व पौधे से पौधे 15 से 20 से.मी. की दूरी पर रखे।
तुडाई – हरिफलियाँ 50-55 दिन उपरान्त ही तोडने की स्थिति में आ जाती है। और फलिया आते ही तुडाई करते रहना चाहिये ताकि अधिक उपज प्राप्त हो सके।
सिचाई:– बुवाई के समय मिट्टी में पर्याप्त नमी का होना आवष्यक है। या बुवाई के तत्काल बाद सिंचाई करें। सिंचाई कि मात्रा भूमि के प्रकार,स्थिति व जलवायु परिस्थितियो पर निर्भर करती है।
पौध संरक्षण उपाय:–
माहँू:– यह कीट नम प्रत्तियों तथा शाखाओं का रस चूसता है। जिससे फसल की बढ़वार रूक जाती है।
नियंत्रण:– डाईमेथोएट 30 ई.सी. की 1-2 मि.ली. या मेथाइल डेमेटान 25 ई.सी. की 2 मि.ली. अथवा मैलाथियान 50ईसी. का 1.5 मि.ली. प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
फली छेदक:– यह कीट फलियों में छेद करके बीज को खाता है।
नियंत्रण:– 1.5-2.0 मि.ली. अथ्वा थायोडान कीटनाषी दवा 2 मि.ली. प्रति लीटर पानी में घोलकर छिडकाव करें।
नोट – उपरोक्त सभी जानकारियां हमारे अनुसंधान केंन्द्र पर किये गये प्रयोग पर आधारित है, भिन्न स्थानों पर भिन्न मौसम, भूमी प्रकार एवं ऋतू के कारण उपरोक्त जानकारी में बदलाव आ सकता है।