Mung is an important Kharif and Zaid season pulse crop, known for its fast maturity, high protein quality, and strong market demand. With proper soil preparation, balanced fertilizers, and timely irrigation, farmers can achieve excellent pod formation and higher yields.
HaldiGhati Seeds brings 4 improved research varieties, each developed for vigorous growth, uniform maturity, and reliable field performance.
Fast-growing, high-yield variety with strong plants and uniform seed setting—ideal for commercial cultivation.
Early maturity, bold shining grain, and consistent pod development even in variable climatic conditions.
Excellent germination, vigorous branches, and long pods with high grain recovery.
Stable performance across different soils, attractive seed color, and high market demand.
"My crop yield improved clearly after switching to Haldighati Seeds."
Babulal
Farmer, Rajasthan"Purity and growth results are far better than other brands."
Rajesh
Farm Dealer, Madhya Pradesh"Their seeds perform consistently even in tough climate conditions."
Narendra
Farmer, Gujarat
किस्मे -चेतक, प्रताप, गुजरात मूंग -4 (GM-4), वीर चेतक
बुवाई का समय:– खरीफ व जायद
खेत की तैयारी:–
खेत को एक या दो बार गहरी जुताई करे व पाटा लगा कर खेत तैयार करे।
खेत तैयार करते समय ध्यान रखे कि खरपतवार व कचरा नष्ट हो जाये।
मिट्टी:–
बलुई दोमट मिट्टी, उपजाऊ, अच्छी जल निकासी वाली होनी चाहिये।
बीज कि मात्रा – 12 से 15 कि.ग्रा. / प्रति हेक्टेयर
बीज हल्दीघाटी सीड्स का संषोधित (रिसर्च) किस्म चेतक उपयोग में लेवे।
उर्वरक:–
1.बुवाई से पहले 15-20 टन जैविक कम्पोस्ट (खाद) प्रति हेक्टेयर मिट्टी में अच्छे से मिलाये।
2.10 कि.ग्रा. नाइट्रोजन छध्ीं व 40 कि.ग्रा. फास्फेट च्2 व्5 ध्ीं प्रति हेक्टेयर बुवाई के समय डाले।
निराई गुडाई:–
अच्छी फसल के लिए निराई गुडाई अवष्य करनी चाहिए। इसके लिए बुवाई के 20 से 25 दिन पश्चात निराई गुडाई करें।
खरपतवार नियन्त्रण के लिए आवष्यकता अनुसार 1-2 बार निराई गुडाई करें।
बुवाई कि विधि व दूरी:-
बुवाई पंक्तियो में करनी चाहिए पंक्ति से पंक्ति की दूरी 30-45 से.मी. व पौधे से पौधे 10 से 12 से.मी. की दूरी पर रखे।
कटाई:– पौधा सुखने, फलीयां पक जाए व बीज परिपक्व अवस्था में आने पर कटाई करें।
सिचाई:– बुवाई के समय मिट्टी में पर्याप्त नमी का होना आवष्यक है। या बुवाई के तत्काल बाद सिंचाई करें। सिंचाई कि मात्रा भूमि के प्रकार,स्थिति व जलवायु परिस्थितियो पर निर्भर करती है।
पौध संरक्षण उपाय:–
चिŸाी जीवाणु रोग:- इस रोग में छोटे गहरे भूरे धब्बे पŸिायों पर तथा प्रकोप बढ़ने पर फलियांे व तनों पर भी दिखाई देते है। रोकथम के लिए स्ट्रेप्टोसाइक्लिन 20 ग्राम या 2 केलो ताम्रयुक्त कवकनाषी प्रति हैक्टेयर छिड़कें।
छाछया रोग:– एक हेक्टेयर में ढाई किलो घुलनषील गंधक अथवा डाइनेकेप 400 मिलीलीटर प्रति हैक्टेयर के घोल का पहला एवं दूसरा छिड़काव 15 दिन के अंतर पर करें या 25 किग्रा. गंधक चूर्ण का भुरकाव करें।
नोट– उपरोक्त सभी जानकारियां हमारे अनुसंधान केंन्द्र पर किये गये प्रयोग पर आधारित है, भिन्न स्थानों पर भिन्न मौसम, भूमी प्रकार एवं ऋतू के कारण उपरोक्त जानकारी में बदलाव आ सकता है।